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कभी काम की बाढ़ और कभी बिल्कुल सन्नाटा? व्यापार में निरंतरता लाने का यह सीक्रेट वास्तु नियम जान लीजिए!

कई व्यवसायियों और कन्सल्टेंट्स के जीवन में एक अजीब पैटर्न देखने को मिलता है—कभी-कभी उनके पास ऑर्डर्स या क्लाइंट्स की बाढ़ आ जाती है, वे अत्यधिक व्यस्त हो जाते हैं, और अचानक कुछ समय के लिए सब कुछ बिल्कुल फ्रीज (Block) हो जाता है। यह निरंतरता (Consistency) की कमी मानसिक रूप से व्यक्ति को थका देती है।

वास्तु पुरुष मंडल में इस निरंतरता और ग्राहकों की संख्या (Number of Clients) को नियंत्रित करने वाले दो मुख्य देव पद हैं: कुबेर (सटीक उत्तर) और मुख्य (उत्तर-पश्चिम और उत्तर का संधि स्थल)।

  1. कुबेर पद का सुप्त होना: उत्तर दिशा अवसरों का द्वार है। यदि यहाँ ऊर्जा का ठहराव है, तो नए ग्राहकों के फोन कॉल्स आना बंद हो जाते हैं और बाजार में आपका खालीपन बढ़ने लगता है।
  2. मुख्य पद का असंतुलन: मुख्य देव का धर्म है आने वाले ऑर्डर्स को आपके सामने निरंतर बनाए रखना। जब यह पद दूषित होता है, तो ऑर्डर्स में भारी उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है।

आम आदमी के लिए सरल समाधान

  • उत्तर दिशा से हटाएं एंटी-कलर: उत्तर दिशा में जल तत्व होता है। यहाँ से हर प्रकार का लाल, गुलाबी या गहरा पीला रंग तुरंत हटाएं। यहाँ पिस्ता ग्रीन (हल्का हरा) या हल्का नीला रंग करवाएं।
  • सक्रियता के लिए प्राकृतिक उपाय: उत्तर दिशा में एक कांच के साफ पात्र में स्वच्छ जल भरकर रखें। यह नए अवसरों और ग्राहकों के प्रवाह को आकर्षित करने का सबसे सरल माध्यम है।
वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन
✍️ लेखक परिचय
वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन
संस्थापक, VASTU CLASS
आवासीय एवं औद्योगिक वास्तु विशेषज्ञ, प्रशिक्षक एवं वास्तु तकनीक शोधकर्ता
लेखक का परिचय

वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन

संस्थापक — VASTU CLASS एवं श्री नवग्रह वाटिका, पानीपत। आवासीय एवं औद्योगिक वास्तु विशेषज्ञ, प्रशिक्षक एवं वास्तु तकनीक शोधकर्ता।

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