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कुंडली में द्वादशेश और बारहवां घर – शुक्र ग्रह के संभावित परिणाम

वैदिक ज्योतिष के अनुसार बारहवें घर से पैर, बांयां नेत्र, चुगलखोरी, सीक्रेट प्लान, हॉस्पिटल, एकांत, मोक्ष, एसाइलम ,शयन सुख, गुप्त सम्बन्ध, जेल आदि का विचार किया जाता है | ये घर व्यक्ति की आंतरिक प्रतिभा का भी घर है। इस घर को व्यय भाव भी कहा जाता है | 

 

बारहवें घर का स्वामी जिस घर में बैठेगा उससे सम्बंधित वस्तुओं का व्यय होगा ये साधारण नियम है, लेकिन बारहवें घर का मालिक दुःस्थान में हो और अशुभ ग्रहों द्वारा देखा जा रहा हो तो विमल योग होता है ऐसा व्यक्ति खर्चे में कमी कर देता है और धनवान बन सकता है साथ ही ऐसा व्यक्ति अपने कार्यों और आचरण से दूसरे लोगों को आकर्षित करता है एवं सफल और विख्यात हो सकता है। अब सिद्धांत की बात करें तो भावेश का खराब जगह बैठना और दुष्ट ग्रहों द्वारा देखा जाना या भाव में अशुभ ग्रहों का बैठना और अशुभ ग्रहों द्वारा देखा जाना इसमें जितनी बातें कुंडली में होंगी उस भाव से सम्बंधित उतनी ही स्थिति खराब होगी। दुःस्थान का स्वामी दुःस्थान में ही हो तो अच्छा फल दे सकता है बशर्ते कुंडली में दूसरे ग्रहों का साथ मिल रहा हो। 

 

प्रेम, रोमांस, ऐश्वर्य, विलासिता, कामवासना, भौतिक सुख साधन का विचार शुक्र से किया जाता है , वह प्रेमी और रोमांस करने वाला होता है। बुद्ध के बाद सौरमंडल में सूर्य के नजदीक रहने वाला ग्रह शुक्र ही है | वृष एवं तुला राशियों का स्वामी होता है | प्रेम – प्रसंग, सौंदर्य एवं आकर्षण का प्रतीक शुक्र को माना गया है ये शुभ ग्रह, जल तत्व, अग्नि कोण दिशा का स्वामी है | संगीत, गायन, चित्रकला, सौंदर्य श्रृंगार, कवि, कला, विवाह – सुख, व्यापार, वाहन सुख,मंत्री, वैभव, सुगंध, घर, मकान, तथा मैथुन का विचार भी शुक्र से किया जाता है | इसके अलावा शुक्र ग्रह स्त्री, वाहन, काम, वीर्य, सुख, वासना, आभूषण, चाँदी आदि का कारक ग्रह है ।

 

कुंडली के बारहवें घर का विश्लेषण करते हुए ज्यादा सावधानी की जरुरत है, क्योंकि बारहवां घर अदृश्य चीजों का घर है । बारहवां घर हमारे अवचेतन मन की इच्छाओं का घर है। ये सार्वभौमिक चेतना का घर है। शुक्र ग्रह प्यार देने और प्यार लेने का कारक ग्रह है। कुंडली में शुक्र बारहवें घर में बलवान होकर बैठा हो तो व्यक्ति को हीलिंग पावर्स दे सकता है। ऐसे व्यक्ति समाज और लोगों की मानसिक परेशानियों को आसानी से दूर कर सकते हैं। बारहवें घर का शुक्र व्यक्ति को नई आध्यात्मिक ऊंचाई दे सकता है। एक अच्छा लेखक बना सकता है। इनका प्रेमपूर्ण जीवन बहुत अनोखा हो सकता है। अपने पार्टनर के साथ ऐसे लोग सीधी और साफ़ लेकिन अनोखी डिमांड कर सकते हैं। जिसके कारण इनके पार्टनर को कई बार असुविधा हो सकती है। हालाँकि ये लोग अपने जीवन की निजी बातें शेयर करना पसंद नहीं करते। अक्सर कई महत्वपूर्ण बातें इनके रहस्यलोक में समा जाती हैं और कभी सामने नहीं आ पाती।

 

कुंडली में शुक्र बारहवें घर में बलवान होकर बैठा हो तो ऐसे लोग मनोविज्ञान में गहरी रूचि ले सकते हैं। लोगों के मनो विज्ञान को समझ लेते हैं, और उनका समाधान भी कर सकते हैं । शुक्र के स्वाभाविक गुणों के कारण इन लोगों में भी कला संगीत और अभिनय क्षेत्र में रूचि हो सकती है। लेकिन सफलता के लिए दूसरे ग्रहों की स्थिति देखनी भी जरुरी है। अक्सर देखने में आया है कि ऐसे लोग बहुत अच्छे आब्जर्वर हो सकते हैं। ऐसे लोग आत्म निरिक्षण करते रहते हैं और अपने अंदर के निरिक्षण से ही सीखते हैं और अध्यात्म की नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकते हैं। करुणा और संवेदना इनके ख़ास गुण हो सकते हैं। ये सब कुछ अपने अनुभव से ही सीखते हैं। इनका व्यक्तित्व बहुत विशाल और गहरा हो सकता है लेकिन आध्यात्मिक तल पर।

 

कुंडली में शुक्र बारहवें घर में हो और उसका विश्लेषण करें तो ऐसे लोग बहुत अच्छे शिक्षक और मार्गदर्शक हो सकते हैं। ये अपनी कला का प्रदर्शन नहीं कर पाते इनके अंदर एक अजीब सा संकोच हो सकता है। अगर उस संकोच को दूर कर दिया जाये तो कला इनके अंदर से सहज रूप से प्रवाहित होने लगती है। ऐसे लोग बहुत विरोधाभासी लग सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकार हो सकते हैं। सौन्दर्यप्रेमी ऐसे लोगों के सम्बन्ध बहुत मशहूर हस्तियों से हो सकते हैं। विदेशों से धन कमा सकते हैं।

 

कुंडली के बारहवें घर में बैठे शुक्र के नकारात्मक परिणामों की बात करें तो इनका बचपन और अनुभव अच्छे नहीं कहे जा सकते। ऐसे लोग बहुत भावुक हो सकते हैं और अपनी बात कहने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। ऐसे लोगों को अनजाना भय बना रह सकता है। असफलता का भय इनको रिस्क लेने से रोक सकता है। अपने प्रेम संबंधों में बहुत आवेशित हो सकते हैं या अनोखी अपेक्षा रख सकते हैं। अक्सर ऐसे लोगों के कई प्रेम सम्बन्ध हो सकते हैं। इनको गुप्तता रखने का शौक हो सकता है। ऐसे लोगों के बचपन में ही संकोच नाम की बीमारी घर कर सकती है जो बाद तक इनका पीछा नहीं छोड़ती।

 

अक्सर देखने में आया है कि बारहवें घर में बैठे शुक्र वाले व्यक्तियों के बचपन की कुछ घटनाएं उनके अवचेतन में छिपी होती हैं। उनका बचपन कई बार कष्टपूर्ण हो सकता है खासकर मन के तल पर। उनके पालन पोषण में माँ-बाप का व्यवहार बहुत रुखा हो सकता है। कारण कुछ भी हो सकता है लेकिन एक बात तय है कि उनके बचपन के अवचेतन मन की कुछ घटनाएं उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। शुक्र ग्रह से अंडाशय, गुर्दा, मुत्राशय संबंधी रोग, धात – प्रेमह, शुगर, पथरी एवं स्त्री रोगों आदि का विचार भी किया जाता है |

 

जिस जातक की कुंडली में शुक्र ग्रह अच्छा होता है वह भौतिक सुख साधनो से संपन्न होता है। शुक्र ग्रह के शुभ परिणाम तभी मिलते हैं जब कुंडली में दूसरे ग्रहों का साथ मिल रहा हो। शुक्र ग्रह के अशुभ परिणाम भी तभी मिलते हैं जब कुंडली में दूसरे ग्रहों का साथ नहीं मिल रहा हो। आज के दौर में शुक्र ग्रह की इम्पोर्टेस को समझा जा सकता है। हम अपने मन के तल पर कुछ बदलावों और उपायों से शुक्र ग्रह के नेगेटिव इफेक्ट्स को कम कर सकते हैं।

 

सबसे महत्वपूर्ण बात होती है कि बारहवें भाव में कौन सी राशि है ,बारहवें भाव में कौन सा ग्रह है उसके साथ कौन से ग्रह हैं उस पर किसकी दृष्टि है, द्वादशेश कंहा है उस पर किसकी दृष्टि है। अकेले द्वादशेश या बारहवें घर में बैठे ग्रह के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए , उसके लिए पूरी कुंडली का विश्लेषण जरुरी है |

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