वास्तु पुरुष मंडल में कोई भी दिशा या देवता अकेला काम नहीं करता। हर दिशा अपने ठीक सामने बैठी विपरीत दिशा (180 डिग्री एक्सिस) के साथ एक गहरे संतुलन में होती है। यदि आपके घर का एक कोना दूषित है, तो उसका सीधा असर उसके ठीक सामने वाले कोने पर पड़ेगा ही।
उदाहरण के लिए, उत्तर (कुबेर – अवसर) और दक्षिण (यम – अनुशासन) आपस में जुड़े हैं। यदि दक्षिण दिशा कमजोर या नीची होगी, तो उत्तर से आने वाले धन के अवसर कभी टिक नहीं पाएंगे। इसी प्रकार, उत्तर-पश्चिम (ग्राहकों का प्रवाह) और दक्षिण-पूर्व (सही समय पर निर्णय) आपस में जुड़े हैं।
आम आदमी के लिए सरल समाधान
- जोड़े में करें सफाई: जब भी आप उत्तर दिशा की सफाई करें, तो उसके ठीक सामने दक्षिण दिशा की व्यवस्था को भी दुरुस्त करें।
- तत्वों का संतुलन: यदि उत्तर-पश्चिम (वायव्य) में खुलापन और हल्कापन है, तो दक्षिण-पूर्व (अग्निकोण) में प्रकाश की उचित व्यवस्था रखें। इन दोनों विपरीत दिशाओं का रंग तालमेल हमेशा सौम्य (क्रीम या ऑफ-व्हाइट) रखना सबसे सुरक्षित और प्रभावी होता है।
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संतान, धन, स्वास्थ्य या पारिवारिक अशांति — इनका एक कारण घर का वास्तु दोष भी होता है
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