किसी भी व्यावसायिक भवन, ऑफिस टावर या कॉम्प्लेक्स में मुख्य द्वार और सीढ़ियों की बनावट पूरे भवन की ऊर्जा तय करती है। गलत दिशा में बना द्वार या सीढ़ी भवन में कार्यरत सभी व्यवसायों को प्रभावित कर सकती है।
मुख्य द्वार की दिशा
व्यावसायिक भवन का मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या ईशान दिशा में होना शुभ माना जाता है। द्वार बड़ा, स्वच्छ और अवरोध-मुक्त होना चाहिए, जिससे भवन में सकारात्मक ऊर्जा और अधिक ग्राहकों का प्रवाह बना रहे।
सीढ़ियों की दिशा व बनावट
सीढ़ियां दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा से आरंभ होकर उत्तर या पूर्व की ओर ऊपर जानी चाहिए। सीढ़ियों की संख्या विषम (जैसे 11, 13, 15) रखना शुभ माना जाता है। सीढ़ियों के नीचे शौचालय या भारी मशीनरी न रखें, इससे ऊर्जा प्रवाह बाधित होता है।
लॉबी व प्रतीक्षा क्षेत्र
प्रवेश द्वार के ठीक बाद की लॉबी को खुला व सुव्यवस्थित रखें। प्रतीक्षा क्षेत्र पूर्व दिशा में रखना उचित रहता है, इससे आगंतुकों में सकारात्मकता बनी रहती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- मुख्य द्वार के सामने सीधे सीढ़ी न हो, इससे ऊर्जा सीधे बाहर निकल जाती है
- द्वार पर टूटी हुई घंटी, बोर्ड या नेमप्लेट तुरंत ठीक करवाएं
- ऊंची इमारतों में भारी संरचना दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें
भवन की बनावट में ये छोटे-छोटे वास्तु सुधार भी लंबे समय में भवन में कार्यरत व्यवसायों की स्थिरता व वृद्धि पर सकारात्मक असर डालते हैं।
वास्तु विद् सुनील कुमार आर्यन
इंडस्ट्रियल वास्तु सलाहकार एवं ट्रेनर
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