साधना ,उपासना ,आराधना ,प्रार्थना और पूजा में क्या अंतर है ?

सिद्धि ,साधना और सिद्ध साधक में क्या अंतर है ? हमारा यह लेख अनेक मिथक तोड़ने वाला है ,आपके भ्रम को मिटाने वाला है ,इसे बहुत गंभीरता से देखें और…

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पितामह भीष्म और श्री कृष्ण संवाद :- महाभारत के युद्ध उपरांत

भीष्म चुप रहे कुछ क्षण बाद बोले," पुत्र युधिष्ठिर का राज्याभिषेक करा चुके केशव ... ? उनका ध्यान रखना परिवार के बुजुर्गों से रिक्त हो चुके राजप्रासाद में उन्हें अब…

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पूर्णिमा पर क्यों सुनी जाती है सत्‍यनारायण व्रत कथा – संपूर्ण जानकारी और विधि

पूर्णिमा पर क्यों सुनी जाती है सत्‍यनारायण व्रत कथा...? आमतौर पर देखा जाता है किसी शुभ काम से पहले या मनोकामनाएं पूरी होने पर सत्यनारायण व्रत की कथा सुनने का…

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योनि पूजा क्यों और किसलिए :-

योनि पूजा क्यों और किसलिए:- अघोर के पञ्च स्तम्भ जिनमे से एक मैथुन है और जिसमे भी चार भाग लिंग योनि वीर्य और रज है। इस पुरे ब्रह्माण्ड और सृष्टी…

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विरक्ति और वैराग्य क्या है और इसमे क्या अन्तर हैं

विरक्ति और वैराग्य में बहुत बड़ा अंतर है । विरक्ति कहते हैं उस तत्व से विमुखता या उससे about turn हो जाना । लेकिन वैराग्य अलग तत्व है । वैराग्य…

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कुण्डलिनी शक्ती जागरण के लक्षण

जब ध्यान साधना के दौरान आपको निम्न लक्षण नज़र आने लगे।।। 1) जब आपको दिव्य दर्शन, सुगन्ध, स्वाद, श्रवण और किसी के आपको छूने की अनुभुति हो । 2) जब…

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जाने सिद्धि’ शब्द का तात्पर्य : सामान्यत ऐसी पारलौकिक और आत्मिक शक्तियों से है जो तप और साधना के द्वारा प्राप्त होती हैं ।

अणिमा महिमा चैव लघिमा गरिमा तथा । प्राप्तिः प्राकाम्यमीशित्वं वशित्वं चाष्ट सिद्धयः ।। अर्थ - अणिमा , महिमा, लघिमा, गरिमा तथा प्राप्ति प्राकाम्य इशित्व और वशित्व ये सिद्धियां "अष्टसिद्धि" कहलाती…

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सारी दुनिया विश्व प्रपंचों के लिए ‘ऊपर’ की ओर देखती है। आकाश ही सनातन है आकाश ही सर्वोपरि है

सारी दुनिया विश्व प्रपंचों के लिए ‘ऊपर’ की ओर देखती है। आकाश ही सनातन है आकाश ही सर्वोपरि है कर्मों के प्रभाव के रहस्य अकाश तत्व में ही पाए जाते…

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नवदुर्गा (नवरात्रि) में माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप श्री शैलपुत्री जी की उपासना विधि

नवदुर्गा (नवरात्रि) में माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप श्री शैलपुत्री जी की उपासना विधिवांछित लाभाय चन्द्रार्द्वकृत शेखराम।वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम॥श्री दुर्गा का प्रथम रूप श्री शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की…

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2021 दिपावली की जानें तिथि और लक्ष्मी पूजा का समय

दिवाली का पर्व पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष के अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. वर्ष 2021 में कार्तिक अमावस्या की तिथि 04 नवंबर, गुरुवार को है.…

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2021- नवंबर तीन , नरक चतुर्दशी / काली चौदस

2021 नरक चतुर्दशी / काली चौदस सनातन धर्म में सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने की परंपरा है. जिसके बाद चन्दन का उबटन एवं तिल के तेल काे शरीर पर लगाया…

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2021- धनतेरस, जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

2021- धनतेरस, जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधिप्रत्येक वर्ष दिवाली से एक दिन पहले धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। हिंदी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास में…

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कैसे जाने अपने कुल देवी देवता को, कौन हैं आपके कुलदेवता /देवी

कैसे जाने अपने कुल देवी देवता को  कौन हैं आपके कुलदेवता /देवी होली दीपावली व दशहरे पर विशेष रूप से अपनी परंपरा अनुसार इनका पूजन भोग आदि देकर आशीर्वाद प्राप्त करे।आज के…

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नवदुर्गा: नौ रूपों में स्त्री जीवन का पूर्ण बिम्ब एक स्त्री के पूरे जीवनचक्र का बिम्ब है नवदुर्गा के नौ स्वरूप

नवदुर्गा: नौ रूपों में स्त्री जीवन का पूर्ण बिम्ब एक स्त्री के पूरे जीवनचक्र का बिम्ब है नवदुर्गा के नौ स्वरूप1. जन्म ग्रहण करती हुई कन्या "शैलपुत्री" स्वरूप है2. कौमार्य…

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7 अक्टूबर 2021 नवरात्रि विशेष

शारदीय नवरात्रि घट (कलश) स्थापना मुहूर्त एवं पूजाविधि प्रतिवर्ष की भांति इसवर्ष भी हिंदुओ के प्रमुख त्योहारो में से एक शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाएगा।…

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संपूर्ण दुर्गा पूजन विधि व पूजा सामग्री और घट स्थापना सहित

 घट स्थापना एवं दुर्गा पूजन की सामग्रीजौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र। यह वेदी कहलाती है।  जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिटटी जिसमे कंकर आदि ना हो। पात्र…

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पितरों को दो श्रेणियों में रखा जा सकता है- दिव्य पितर और मनुष्य पितर

पुराण अनुसार मुख्यत: पितरों को दो श्रेणियों में रखा जा सकता है- दिव्य पितर और मनुष्य पितर। दिव्य पितर उनका का नाम है, जो जीवधारियों के कर्मों को देखकर मृत्यु…

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नवरात्रि 2021 — 7 अक्टूबर से शुरू होगी , जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और विधि

नवरात्रि में घटस्थापना अथवा कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है. ये नवरात्रि का पहला दिन होता है. प्रतिपदा तिथि को शुभ मुहुर्त में पूरे विधि-विधान के साथ घट स्थापना…

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नवचण्डी पूजा का विधान

Navchandi Pooja 7 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक शारदीय नवरात्रों का पर्व बहुत ही धूम धाम से हम सभी एक साथ मिलकर मनाएंगे। नवरात्र के दौरान हमारे अंदर एक नौ…

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पितृपक्ष में करें यह उपाय, पितर होंगे प्रसन्न

पितरों को देवताओं के समान माना गया है। पितरों के खुश होने पर देवी-देवता प्रसन्न होते हैं। देव, ऋषि और पितृ ऋण के निवारण के लिए श्राद्ध कर्म सबसे आसान…

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