करियर चयन जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक है। ज्योतिष में जन्म कुंडली का दशम भाव कर्म, पेशा व सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ा मुख्य भाव माना जाता है, जिसका अध्ययन करियर दिशा समझने में सहायक हो सकता है।
दशम भाव व दशमेश की भूमिका
दशम भाव में स्थित ग्रह व दशम भाव के स्वामी (दशमेश) की राशि, नक्षत्र व दृष्टि करियर की प्रकृति तय करने में सहायक मानी जाती है। यह भाव जितना मजबूत होगा, करियर में स्थिरता व उन्नति की संभावना उतनी अधिक मानी जाती है।
ग्रहों के अनुसार पेशा संकेत
सूर्य प्रबल हो तो प्रशासनिक व नेतृत्व क्षेत्र, बुध प्रबल हो तो लेखन, व्यापार व संचार क्षेत्र, गुरु प्रबल हो तो शिक्षा व परामर्श क्षेत्र, शनि प्रबल हो तो श्रम प्रधान व अनुशासित क्षेत्र, तथा शुक्र प्रबल हो तो कला व सौंदर्य से जुड़े क्षेत्र अनुकूल माने जाते हैं।
दशा का प्रभाव
वर्तमान में चल रही ग्रह दशा भी करियर के उतार-चढ़ाव को प्रभावित करती है। किसी शुभ ग्रह की दशा में करियर में नए अवसर व वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- केवल राशि या सूर्य चिन्ह देखकर करियर तय न करें, संपूर्ण कुंडली आवश्यक है
- अपनी रुचि व कौशल को भी उतना ही महत्व दें जितना ज्योतिषीय संकेतों को
- करियर परिवर्तन से पहले दशा-अंतर्दशा का विश्लेषण उपयोगी रहता है
ज्योतिष करियर की दिशा समझने में एक सहायक उपकरण हो सकता है, परंतु निरंतर मेहनत, कौशल विकास व सही अवसरों की पहचान ही वास्तविक सफलता की कुंजी है।
वास्तु विद् सुनील कुमार आर्यन
इंडस्ट्रियल वास्तु सलाहकार एवं ट्रेनर
वास्तु परामर्श हेतु यहाँ संपर्क करें

