भूखंड की मिट्टी परीक्षण वास्तु विधि — शुभ-अशुभ संकेत
भूखंड खरीदने या निर्माण शुरू करने से पहले वास्तु शास्त्र में मिट्टी की गुणवत्ता और प्रकृति की जांच को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसे "भूमि परीक्षा" कहा जाता है।…
भूखंड खरीदने या निर्माण शुरू करने से पहले वास्तु शास्त्र में मिट्टी की गुणवत्ता और प्रकृति की जांच को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसे "भूमि परीक्षा" कहा जाता है।…
भूखंड खरीदते समय केवल उसकी आंतरिक बनावट, दिशा और आकार ही महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि उसके आसपास मौजूद संरचनाएं भी वास्तु की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। मंदिर, श्मशान…
जब भी कोई भूखंड खरीदा जाता है, तो अधिकांश लोग उसके आकार, क्षेत्रफल और स्थान पर ध्यान देते हैं, लेकिन उस भूखंड के चारों ओर मौजूद सड़कों की दिशा को…
हर भूखंड आदर्श वर्गाकार या आयताकार आकार में उपलब्ध नहीं होता। कई बार जगह की उपलब्धता, सड़क की बनावट या पुराने भूमि विभाजन के कारण भूखंड त्रिकोणीय, L-आकार, गोलाकार किनारों…
शहरी क्षेत्रों में जहां भूखंडों की उपलब्धता सीमित होती जा रही है, वहां कोने का भूखंड (कॉर्नर प्लॉट) अक्सर एक आकर्षक विकल्प के रूप में सामने आता है — यह…
जब भी किसी भूखंड का वास्तु विश्लेषण किया जाता है, तो सबसे पहले जिस बिंदु पर ध्यान दिया जाता है वह है ब्रह्मस्थान — यानी भूखंड का ठीक केंद्रीय भाग।…
भूखंड या मकान खरीदते समय सबसे पहला और सबसे आम सवाल यही उठता है — “यह किस दिशा का है?” अधिकांश लोगों की धारणा है कि केवल पूर्वमुखी या उत्तरमुखी भूखंड ही शुभ होते हैं, जबकि दक्षिणमुखी या पश्चिममुखी भूखंडों को लेकर एक आम भ्रम व झिझक देखी जाती है। वास्तव में, वास्तु शास्त्र के […]
पानी जीवन का आधार है, और वास्तु शास्त्र में इसे पंचतत्वों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व माना गया है। घर या भूखंड में कुआं, बोरवेल, हैंडपंप अथवा पानी की टंकी की स्थिति का निर्धारण वास्तु शास्त्र में विशेष सावधानी से करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि जल तत्व से जुड़े स्थान का सीधा […]
जब भी हम कोई भूखंड खरीदने या मूल्यांकन करने जाते हैं, तो जमीन के समतल या ढलान पर अक्सर उतना ध्यान नहीं दिया जाता जितना उसके आकार, स्थान या कीमत पर दिया जाता है। जबकि वास्तु शास्त्र की दृष्टि से भूमि का ढलान एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारक माना गया है, क्योंकि यह न केवल जल-निकासी […]
जब भी कोई परिवार अपने सपनों का घर बनाने के लिए भूखंड चुनने निकलता है, तो अक्सर सबसे पहले जिस भौतिक विशेषता पर उसकी नजर जाती है, वह है भूखंड की सीमाएं व उसका समग्र आकार। यह स्वाभाविक भी है — आकार को देखकर ही अनुमान लगाया जा सकता है कि उस पर कैसा भवन […]
भारतीय गृह-निर्माण परंपरा में यह मान्यता रही है कि भूमि केवल एक निर्जीव संपत्ति नहीं, बल्कि एक जीवंत आधार है जिस पर पूरे परिवार का भविष्य टिका होता है। यही कारण है कि पीढ़ियों से घर बनाने से पहले बुजुर्ग परिवारजन व स्थानीय वास्तु विशेषज्ञ मिलकर भूखंड का सूक्ष्म निरीक्षण करते रहे हैं। आज भले […]
वास्तु शास्त्र में किसी भी निर्माण से पहले जिस एक विषय पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाता है, वह है भूमि ऊर्जा — यानी वह भूखंड जिस पर घर, दुकान या कोई भी भवन बनाया जाना है, उसकी प्राकृतिक ऊर्जा कैसी है। भारतीय वास्तु परंपरा मानती है कि पृथ्वी स्वयं एक जीवंत तत्व है, और […]