वैदिक ज्योतिष में जन्म कुंडली का षष्ठ भाव रोग, शत्रु व दैनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से जुड़ा माना जाता है। इस भाव व इसके स्वामी ग्रह की स्थिति का अध्ययन स्वास्थ्य प्रवृत्तियों को समझने में एक परंपरागत तरीका माना जाता है।
षष्ठ भाव का कारकत्व
षष्ठ भाव दैनिक दिनचर्या, रोग प्रतिरोधक क्षमता व शारीरिक चुनौतियों से जुड़ा है। इस भाव में पीड़ित ग्रह होने पर संबंधित अंग या तंत्र से जुड़ी समस्याओं की प्रवृत्ति देखी जा सकती है।
लग्न व लग्नेश की भूमिका
लग्न भाव शरीर की मूल संरचना व जीवनशक्ति का प्रतीक है। लग्नेश यदि दुर्बल स्थिति में हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो यह सामान्य स्वास्थ्य में कमजोरी का संकेत माना जाता है।
ग्रह दशा व स्वास्थ्य
जिस ग्रह की दशा या अंतर्दशा चल रही हो, यदि वह पीड़ित स्थिति में है तो उस दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। यह विश्लेषण चिकित्सकीय जांच का विकल्प नहीं बल्कि एक अतिरिक्त सजगता का माध्यम माना जाता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- ज्योतिषीय संकेत कभी भी चिकित्सकीय निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं
- किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श सर्वप्रथम आवश्यक है
- नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार व सकारात्मक सोच स्वास्थ्य के लिए सदैव लाभकारी है
ज्योतिष स्वास्थ्य प्रवृत्तियों के प्रति सजग रहने में सहायक हो सकता है, परंतु वास्तविक स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सा विज्ञान व अनुशासित जीवनशैली पर ही आधारित होनी चाहिए।
वास्तु विद् सुनील कुमार आर्यन
इंडस्ट्रियल वास्तु सलाहकार एवं ट्रेनर
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