वित्तीय निर्णय जैसे ऋण लेना, निवेश करना या बचत करना, जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों में गिने जाते हैं। ज्योतिष में कुंडली के द्वितीय, षष्ठ, एकादश व द्वादश भाव धन व ऋण की स्थिति समझने में देखे जाते हैं।
द्वितीय व एकादश भाव
द्वितीय भाव संचित धन, पारिवारिक संपत्ति व वाणी से जुड़ा है, जबकि एकादश भाव आय के स्रोत, लाभ व इच्छापूर्ति का कारक माना जाता है। इन दोनों भावों की मजबूत स्थिति वित्तीय स्थिरता का संकेत मानी जाती है।
ऋण व षष्ठ-द्वादश भाव
षष्ठ भाव ऋण लेने की प्रवृत्ति दर्शाता है, जबकि द्वादश भाव व्यय व ऋण चुकाने से जुड़ा है। यदि द्वादश भाव व उसका स्वामी कमजोर स्थिति में हों, तो वित्तीय प्रबंधन में सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
शुभ ग्रह प्रभाव
गुरु व शुक्र की शुभ स्थिति धन वृद्धि व वित्तीय स्थिरता में सहायक मानी जाती है, जबकि राहु-केतु या शनि की पीड़ादायक स्थिति वित्तीय उतार-चढ़ाव का संकेत दे सकती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- कोई भी बड़ा वित्तीय निर्णय लेने से पहले व्यावहारिक वित्तीय योजना बनाएं
- ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन आय व व्यय के आधार पर करें
- ज्योतिषीय संकेतों को केवल एक अतिरिक्त दृष्टिकोण के रूप में लें
ज्योतिष वित्तीय प्रवृत्तियों की एक झलक दे सकता है, परंतु ठोस वित्तीय स्वास्थ्य अनुशासित बचत, समझदार निवेश व सही योजना पर ही निर्भर करता है।
वास्तु विद् सुनील कुमार आर्यन
इंडस्ट्रियल वास्तु सलाहकार एवं ट्रेनर
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