आज के समय में शिक्षा, रोजगार या स्थायी निवास के लिए विदेश जाना एक सामान्य आकांक्षा बन गई है। ज्योतिष में कुंडली के कुछ विशेष भाव व ग्रह इस दिशा में संभावनाओं का संकेत देने के लिए देखे जाते हैं।
द्वादश भाव का कारकत्व
द्वादश भाव को विदेश यात्रा, स्थायी निवास व दूर स्थानों से जोड़ा जाता है। यह भाव व इसका स्वामी ग्रह जितना मजबूत होगा, विदेश यात्रा व वहां बसने की संभावना उतनी अधिक मानी जाती है।
राहु व नवम भाव की भूमिका
राहु को विदेश यात्रा का प्रमुख कारक ग्रह माना जाता है। यदि राहु की स्थिति नवम, द्वादश या लग्न भाव से संबंध बनाए, तो यह विदेश गमन के प्रबल योग का संकेत माना जाता है। नवम भाव भाग्य व लंबी यात्राओं से जुड़ा है।
शुभ समय का चयन
विदेश यात्रा या वीज़ा आवेदन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए संबंधित ग्रह की दशा-अंतर्दशा व शुभ मुहूर्त का चयन एक परंपरागत तरीका माना जाता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- वीज़ा व आव्रजन नियमों की जानकारी संबंधित आधिकारिक स्रोतों से ही लें
- ज्योतिषीय संकेतों के साथ दस्तावेजों की तैयारी व व्यावहारिक योजना भी जरूरी है
- अनुभवी ज्योतिषी से संपूर्ण कुंडली विश्लेषण करवाना उपयोगी रहता है
ज्योतिष विदेश यात्रा की संभावनाओं की एक झलक दे सकता है, परंतु सफलता सही तैयारी, दस्तावेजों की पूर्णता व निरंतर प्रयास पर निर्भर करती है।
वास्तु विद् सुनील कुमार आर्यन
इंडस्ट्रियल वास्तु सलाहकार एवं ट्रेनर
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