अक्सर कई पेशेवर, हीलर्स और कन्सल्टेंट्स यह शिकायत करते हैं कि वे अपने क्लाइंट्स को अपना शत-प्रतिशत ज्ञान और ऊर्जा देते हैं, उनके काम के सकारात्मक परिणाम भी आते हैं, लेकिन काम होने के बाद उन्हें वह आदर, कृतज्ञता और ‘रिगार्ड’ नहीं मिलता जिसकी वे अपेक्षा करते हैं। लोग इसे केवल अपनी किस्मत मान लेते हैं और उस मार्गदर्शक को भूल जाते हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, समाज में मान-सम्मान, मान्यता (Recognition) और एक प्रामाणिक अथॉरिटी का सीधा संबंध भवन की पूर्व (East) और दक्षिण (South) दिशा से होता है।
- पूर्व दिशा (अर्यमा पद): पूर्व दिशा हमारे सामाजिक संबंधों और नेटवर्किंग को नियंत्रित करती है। यदि इस दिशा में कोई असंतुलन हो, तो समाज से व्यक्ति का जुड़ाव टूट जाता है। लोग आपकी विद्या का लाभ तो उठाएंगे, लेकिन आपको उसका श्रेय (Credit) नहीं देंगे।
- दक्षिण दिशा (विवस्वान पद): दक्षिण दिशा यश और कीर्ति का क्षेत्र है। यहाँ यदि तत्व असंतुलन हो, तो व्यक्ति की ब्रांड वैल्यू धूमिल हो जाती है और उसकी मेहनत के बाद भी लोग उसे उचित सम्मान नहीं देते।
आम आदमी के लिए सरल समाधान
- पूर्व दिशा की शुद्धि: अपने भवन की पूर्व दिशा को हमेशा साफ, स्वच्छ और हवादार रखें। यहाँ सुबह की ताजी हवा और रोशनी का आना अनिवार्य है। यहाँ कोई भी भारी कबाड़ या पीला रंग न रखें।
- दक्षिण दिशा को दें बल: दक्षिण दिशा में शाम के समय प्रकाश की उचित व्यवस्था रखें (एक लाल बल्ब जलाना बहुत प्रभावी होता है) और इस क्षेत्र में भारी सामान या भारी गमले रखें ताकि यह हिस्सा स्थिर रहे।
- प्रोफेशनल टिप: काम पूरा होने के बाद क्लाइंट्स से पेशेवर तरीके से लिखित या वीडियो प्रशंसापत्र (Testimonial) ज़रूर लें। जब दूसरे आपकी सराहना करेंगे, तो समाज का नजरिया स्वतः बदलेगा।

