बच्चों का शारीरिक विकास, स्वास्थ्य और पढ़ाई में एकाग्रता – इन सभी पर उनके कमरे की दिशा और व्यवस्था का असर पड़ता है, ऐसा वास्तु शास्त्र में माना गया है। सही व्यवस्था बच्चों के आत्मविश्वास व प्रदर्शन को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।
कमरे की सही दिशा
बच्चों का कमरा उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में होना उपयुक्त माना जाता है। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बच्चों का शयनकक्ष होने से बेचैनी या एकाग्रता में कमी आ सकती है।
स्टडी टेबल की दिशा
पढ़ाई की मेज इस तरह रखें कि बच्चा पढ़ते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करे। पूर्व दिशा सूर्योदय से जुड़ी होने के कारण एकाग्रता व बुद्धि बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। मेज के ठीक पीछे दीवार के बजाय थोड़ी जगह छोड़ें।
सोने की सही व्यवस्था
बच्चों को सिर पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर करके सुलाना अच्छा माना जाता है। इससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, जो सीधे उनकी एकाग्रता व सीखने की क्षमता से जुड़ी है।
खिलौने व सामान की व्यवस्था
खिलौने और अतिरिक्त सामान कमरे में बिखरे न रहें, इन्हें उत्तर-पश्चिम दिशा में व्यवस्थित रूप से रखें। अव्यवस्थित कमरा बच्चों में चिड़चिड़ापन और ध्यान भटकाव बढ़ा सकता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- कमरे में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी व हवा का प्रवाह हो
- बिस्तर के ठीक ऊपर भारी शोपीस या बीम न हो
- दक्षिण-पश्चिम दिशा में बच्चों का शयनकक्ष रखने से बचें, यह दिशा बड़ों के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है
इन सरल वास्तु सुझावों को अपनाकर बच्चों के कमरे में एक ऐसा वातावरण बनाया जा सकता है जो उनकी नींद, स्वास्थ्य और पढ़ाई तीनों के लिए सहायक हो।
वास्तु विद् सुनील कुमार आर्यन
इंडस्ट्रियल वास्तु सलाहकार एवं ट्रेनर
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