क्यूँ होता है मानव शापित – क्या इसका प्रभाव शारीरिक रोगों पर भी पड़ता है ?

बहुत बड़े लेवल पर यदि आप पैरानॉर्मल प्रभावित कार्य करते हैं तो इससे आपके लीवर पर इनका अधिक प्रभाव आता है  और लीवर की अग्नि धीरे धीरे असंतुलित हो जाती…

Continue Readingक्यूँ होता है मानव शापित – क्या इसका प्रभाव शारीरिक रोगों पर भी पड़ता है ?

साधना ,उपासना ,आराधना ,प्रार्थना और पूजा में क्या अंतर है ?

सिद्धि ,साधना और सिद्ध साधक में क्या अंतर है ? हमारा यह लेख अनेक मिथक तोड़ने वाला है ,आपके भ्रम को मिटाने वाला है ,इसे बहुत गंभीरता से देखें और…

Continue Readingसाधना ,उपासना ,आराधना ,प्रार्थना और पूजा में क्या अंतर है ?

पितामह भीष्म और श्री कृष्ण संवाद :- महाभारत के युद्ध उपरांत

भीष्म चुप रहे कुछ क्षण बाद बोले," पुत्र युधिष्ठिर का राज्याभिषेक करा चुके केशव ... ? उनका ध्यान रखना परिवार के बुजुर्गों से रिक्त हो चुके राजप्रासाद में उन्हें अब…

Continue Readingपितामह भीष्म और श्री कृष्ण संवाद :- महाभारत के युद्ध उपरांत

पूर्णिमा पर क्यों सुनी जाती है सत्‍यनारायण व्रत कथा – संपूर्ण जानकारी और विधि

पूर्णिमा पर क्यों सुनी जाती है सत्‍यनारायण व्रत कथा...? आमतौर पर देखा जाता है किसी शुभ काम से पहले या मनोकामनाएं पूरी होने पर सत्यनारायण व्रत की कथा सुनने का…

Continue Readingपूर्णिमा पर क्यों सुनी जाती है सत्‍यनारायण व्रत कथा – संपूर्ण जानकारी और विधि

योनि पूजा क्यों और किसलिए :-

योनि पूजा क्यों और किसलिए:- अघोर के पञ्च स्तम्भ जिनमे से एक मैथुन है और जिसमे भी चार भाग लिंग योनि वीर्य और रज है। इस पुरे ब्रह्माण्ड और सृष्टी…

Continue Readingयोनि पूजा क्यों और किसलिए :-

विरक्ति और वैराग्य क्या है और इसमे क्या अन्तर हैं

विरक्ति और वैराग्य में बहुत बड़ा अंतर है । विरक्ति कहते हैं उस तत्व से विमुखता या उससे about turn हो जाना । लेकिन वैराग्य अलग तत्व है । वैराग्य…

Continue Readingविरक्ति और वैराग्य क्या है और इसमे क्या अन्तर हैं

कुण्डलिनी शक्ती जागरण के लक्षण

जब ध्यान साधना के दौरान आपको निम्न लक्षण नज़र आने लगे।।। 1) जब आपको दिव्य दर्शन, सुगन्ध, स्वाद, श्रवण और किसी के आपको छूने की अनुभुति हो । 2) जब…

Continue Readingकुण्डलिनी शक्ती जागरण के लक्षण

जाने सिद्धि’ शब्द का तात्पर्य : सामान्यत ऐसी पारलौकिक और आत्मिक शक्तियों से है जो तप और साधना के द्वारा प्राप्त होती हैं ।

अणिमा महिमा चैव लघिमा गरिमा तथा । प्राप्तिः प्राकाम्यमीशित्वं वशित्वं चाष्ट सिद्धयः ।। अर्थ - अणिमा , महिमा, लघिमा, गरिमा तथा प्राप्ति प्राकाम्य इशित्व और वशित्व ये सिद्धियां "अष्टसिद्धि" कहलाती…

Continue Readingजाने सिद्धि’ शब्द का तात्पर्य : सामान्यत ऐसी पारलौकिक और आत्मिक शक्तियों से है जो तप और साधना के द्वारा प्राप्त होती हैं ।

सारी दुनिया विश्व प्रपंचों के लिए ‘ऊपर’ की ओर देखती है। आकाश ही सनातन है आकाश ही सर्वोपरि है

सारी दुनिया विश्व प्रपंचों के लिए ‘ऊपर’ की ओर देखती है। आकाश ही सनातन है आकाश ही सर्वोपरि है कर्मों के प्रभाव के रहस्य अकाश तत्व में ही पाए जाते…

Continue Readingसारी दुनिया विश्व प्रपंचों के लिए ‘ऊपर’ की ओर देखती है। आकाश ही सनातन है आकाश ही सर्वोपरि है

यह होते हैं अलग अलग रंग से बने स्वस्तिक के लाभ ,

यह होते हैं स्वस्तिक के लाभ स्वस्तिक हर दिशा से देखने पर समान दिखाई देता है इसलिये घर के वास्तु को ठीक करने के लिये यह बहुत लाभकारी माना जाता…

Continue Readingयह होते हैं अलग अलग रंग से बने स्वस्तिक के लाभ ,