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विदिशा प्लॉट में ऊर्जा के भ्रमण पर अवरद्ध पैदा होगा सूक्ष्म विश्लेषण कुछ लाइनों में

वास्तु में रुचि रखने वाले मित्रों के लिए

विदिशा घर में दो तत्व के क्षेत्र बड़े और दो तत्व के क्षेत्र छोटे हो जाते हे । जब की सुसंगतता तब कहलाती हे जब चारो तत्व एक समान क्षेत्र ( वॉल्यूम) के हो । इसी कारण विदिशा गृह में ऊर्जा संतुलित नही रहती । 

उदाहरण के तोर पे अगर एक 18डिग्री पूर्वी झुकाव विदिशा गृह को देखे तो यहां अग्नि और वायुका क्षेत्र , जल और भूमि के सापेक्ष नोंधनीय कम हे ।

मतलब ऐसे गृह में व्यापार मंदा रहेगा साथ ही यहां रहने। वाले लोगो के शरीर में वायु एवम अग्नि की कमी होगी ।

और यही ऊर्जा की मात्रा अवकाश तत्व में भी कमी पाई जायेगी ।

 साथ ही ऊर्जा के भ्रमण में अवरद्ध पैदा होगा ।

वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन
✍️ लेखक परिचय
वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन
संस्थापक, VASTU CLASS
आवासीय एवं औद्योगिक वास्तु विशेषज्ञ, प्रशिक्षक एवं वास्तु तकनीक शोधकर्ता
लेखक का परिचय

वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन

संस्थापक — VASTU CLASS एवं श्री नवग्रह वाटिका, पानीपत। आवासीय एवं औद्योगिक वास्तु विशेषज्ञ, प्रशिक्षक एवं वास्तु तकनीक शोधकर्ता।

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