पहला प्रयोग : गर्भधारण में शिवलिंगी बीज के फायदे*
शिवलिंगी के 9-9 बीज दूध या पानी में घोंटकर प्रातःकाल खाली पेट मासिक के पाँचवें दिन से चार दिन तक लेने से लाभ होता है।
दूसरा प्रयोग : बांझपन को दूर करने में शिवलिंगी बीज के फायदे
इसके 30 बीज, 6 ग्राम पीपल की जटा, 6 ग्राम गज केसर के साथ घोंटकर 3-3 ग्राम की गोली बनाकर ऋतू धर्म के बाद शुद्ध होकर प्रतिदिन गर्म दूध चीनी के साथ खाने से बन्ध्या भी पुत्रवती होती है |
तीसरा प्रयोग : गर्भपातसे रक्षा और पुत्र प्राप्ति हेतु में शिवलिंगी बीज के फायदे
शिवलिंगी बीज पुत्र प्राप्ति हेतु –एक सुच्चा मोती, सोने का भस्म, शिवलिंगी के 5 बीज, भांग के 5 दाने स्त्री को गर्भाधान के बाद 60 से 64 इन पांच दिनों में किसी भी एक दिन बछड़े वाली गाय या काली बकरी के 250 मिलीलीटर कच्चे दूध से सुबह को निराहार (बिना कुछ खाए-पिए) देना चाहिए। इससे गर्भपात नहीं होता है और पुत्र उत्पन्न होता है।
शिवलिंगी के लगभग 27 बीज, बड़ की डाढ़ी लगभग 6 ग्राम गजकेसर 6 ग्राम को पीसकर 3 पुड़िया बना लें। माहवारी खत्म होने के बाद बछड़े वाली गाय या काली बकरी के कच्चे दूध में खीर बनाकर उसमें एक चम्मच घी और खाण्ड मिलाकर एक पुड़िया और शिवलिंगी के 5 साबूत बीज मिलाकर ऊपर से खीर का सेवन करते हैं। ऐसा तीन दिनों तक लगातार करना चाहिए। इससे गर्भ रहता है। लड़का हो तो जीवित भी रहता है।
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