आजकल शहरों में ज्यादातर लोग स्वतंत्र मकान की जगह फ्लैट या अपार्टमेंट खरीदना पसंद करते हैं। प्लॉट की तरह फ्लैट में दिशा या आकार पूरी तरह नहीं बदला जा सकता, इसलिए खरीदने से पहले ही वास्तु अनुसार जांच कर लेना बेहतर रहता है।
यूनिट का आकार व बनावट
चौकोर या आयताकार आकार का फ्लैट प्राथमिकता दें। अत्यधिक कोण या असामान्य बनावट वाले यूनिट से बचें। सुनिश्चित करें कि केंद्र भाग (ब्रह्मस्थान) में कोई बीम, पिलर या शौचालय न हो।
रोशनी व वेंटिलेशन
फ्लैट में पूर्व या उत्तर दिशा से पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी आनी चाहिए। क्रॉस-वेंटिलेशन (हवा का आर-पार बहाव) वाला यूनिट स्वास्थ्य व ऊर्जा दोनों के लिए बेहतर माना जाता है।
बालकनी व मुख्य द्वार की दिशा
बालकनी उत्तर या पूर्व दिशा में हो तो अच्छा रहता है। यूनिट का मुख्य द्वार सीधे लिफ्ट या सीढ़ी के सामने न खुले, इससे ऊर्जा का सीधा बहिर्गमन होता है।
मंजिल का चुनाव
बहुत ऊंची मंजिल की तुलना में मध्य मंजिलें (न बहुत नीचे, न बहुत ऊपर) ऊर्जा संतुलन की दृष्टि से बेहतर मानी जाती हैं, हालांकि यह व्यक्तिगत प्राथमिकता पर भी निर्भर करता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- किचन दक्षिण-पूर्व व मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम में होना बेहतर रहता है
- शौचालय ईशान कोण में न हो, इसकी पुष्टि जरूर करें
- सोसाइटी का मुख्य प्रवेश द्वार भी उत्तर या पूर्व दिशा में हो तो अतिरिक्त शुभ माना जाता है
फ्लैट में पूर्ण वास्तु अनुकूलता मिलना कठिन हो सकता है, लेकिन खरीदने से पहले इन बिंदुओं की जांच करने से बाद में आने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है।
वास्तु विद् सुनील कुमार आर्यन
इंडस्ट्रियल वास्तु सलाहकार एवं ट्रेनर
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