नई प्रॉपर्टी की तुलना में पुरानी या रीसेल प्रॉपर्टी खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी है, क्योंकि पिछले मालिकों द्वारा किए गए बदलाव भवन की ऊर्जा को प्रभावित कर सकते हैं।
कानूनी व पारिवारिक इतिहास
प्रॉपर्टी का कानूनी इतिहास जरूर जांचें – कोई विवाद, मुकदमा या बार-बार हाथ बदलने का इतिहास न हो। वास्तु मान्यता के अनुसार बार-बार बिकने वाली प्रॉपर्टी में स्थिरता की कमी हो सकती है, हालांकि यह हमेशा नियम नहीं है।
संरचनात्मक बदलाव की जांच
पुराने घरों में अक्सर समय के साथ कमरे जोड़े या हटाए जाते हैं। जांच करें कि मूल संरचना में कोई बड़ा असंतुलन तो नहीं आया – जैसे ब्रह्मस्थान (केंद्र) में नया निर्माण, या ईशान कोण को काटकर बनाया गया कोई एक्सटेंशन।
मरम्मत व रखरखाव की स्थिति
दीवारों में सीलन, पानी का रिसाव या पुरानी वायरिंग की समस्या न केवल सुरक्षा बल्कि वास्तु दृष्टि से भी नकारात्मक ऊर्जा का संकेत मानी जाती है। खरीदने से पहले इनकी पूरी जांच करवाएं।
पिछले उपयोग की जानकारी
यदि संभव हो तो पता करें कि प्रॉपर्टी का पिछला उपयोग क्या था – कई बार व्यावसायिक स्थान को आवासीय रूप में बदला जाता है, जिससे मूल वास्तु संतुलन बिगड़ सकता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- प्रवेश द्वार व सीढ़ियों की मूल दिशा में कोई बदलाव तो नहीं हुआ, जांचें
- पुरानी बिजली फिटिंग व फायर सेफ्टी जरूर चेक करवाएं
- जरूरत पड़ने पर हल्के वास्तु सुधार (रंग, दिशा अनुसार सामान की व्यवस्था) करवाकर घर में प्रवेश करें
पुरानी प्रॉपर्टी खरीदना बुरा निर्णय नहीं है, बस थोड़ी अतिरिक्त सतर्कता और विशेषज्ञ वास्तु निरीक्षण भविष्य की परेशानियों से बचा सकता है।
वास्तु विद् सुनील कुमार आर्यन
इंडस्ट्रियल वास्तु सलाहकार एवं ट्रेनर
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