भूमि पूजन मुहूर्त — विधि एवं शुभ मुहूर्त कैसे तय करें

भूमि पूजन (शिलान्यास) किसी भी नए निर्माण कार्य से पहले किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है, जिसमें भूमि की खुदाई व नींव रखने से पूर्व भूमि के स्वामी देवता — वास्तु पुरुष व पृथ्वी माता — का पूजन कर निर्माण कार्य के निर्विघ्न व शुभ संपन्न होने की कामना की जाती है।

भूमि पूजन के लिए मुहूर्त कैसे तय होता है?

भूमि पूजन का मुहूर्त गृह प्रवेश से भिन्न सिद्धांतों पर आधारित होता है, क्योंकि इसमें भूमि खोदने का कार्य होता है। मुख्यतः निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जाता है:

  • शुक्ल पक्ष की तिथियां वरीयता में रहती हैं, विशेषकर द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी व त्रयोदशी।
  • रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मृगशिरा व रेवती जैसे नक्षत्र शुभ माने जाते हैं।
  • सोमवार, बुधवार, गुरुवार व शुक्रवार को भूमि पूजन के लिए उत्तम दिन माना गया है।
  • चातुर्मास काल (लगभग जुलाई-अंत से नवंबर के मध्य तक) में भूमि पूजन जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
  • भूमि स्वामी व मुख्य निर्माण-कर्ता की व्यक्तिगत कुंडली में चंद्रबल व तारा बल भी देखा जाता है।

2026 के लिए सटीक तिथियां जल्द

वर्ष 2026 के लिए भूमि पूजन की विशिष्ट शुभ तिथियों की सूची किसी प्रामाणिक व सत्यापित पंचांग स्रोत से क्रॉस-चेक करने के बाद यहां प्रकाशित की जाएगी, ताकि गलत या अपुष्ट तिथि के कारण किसी को असुविधा न हो। तब तक, हम सुझाव देते हैं कि भूमि पूजन की तिथि तय करने से पहले उस दिन का पंचांग अवश्य देखें अथवा हमसे व्यक्तिगत परामर्श लें, जिसमें आपकी कुंडली व भूमि की दिशा के अनुसार सटीक मुहूर्त निकाला जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भूमि पूजन और गृह प्रवेश में क्या अंतर है?

भूमि पूजन निर्माण शुरू करने से पहले, नींव रखते समय किया जाता है, जबकि गृह प्रवेश निर्माण पूर्ण होने के बाद घर में पहली बार रहने के लिए प्रवेश करते समय किया जाता है। दोनों के मुहूर्त-सिद्धांत अलग होते हैं।

भूमि पूजन के लिए कौन-सी तिथियां वर्जित मानी जाती हैं?

अमावस्या, चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी तथा रिक्ता तिथियां सामान्यतः भूमि पूजन के लिए वर्जित मानी जाती हैं। इसके अलावा भद्रा व राहुकाल के समय भी पूजन नहीं करना चाहिए।

क्या भूमि पूजन की तिथि व्यक्ति की कुंडली के अनुसार भी तय होती है?

हां, सामान्य पंचांग-आधारित शुभ तिथियों के साथ-साथ भूमि स्वामी की जन्म कुंडली, चंद्रबल व वर्तमान ग्रह-गोचर को देखकर भी व्यक्तिगत रूप से सर्वोत्तम मुहूर्त निकाला जा सकता है।

भूमि पूजन में सबसे पहले क्या कार्य किया जाता है?

सबसे पहले चुने गए स्थान की शुद्धि, गणेश पूजन व नवग्रह पूजन किया जाता है, इसके बाद शुभ मुहूर्त में भूमि के ईशान कोण से पहली खुदाई या कुदाल चलाने की परंपरा है।

क्या बरसात के मौसम (चातुर्मास) में भूमि पूजन किया जा सकता है?

नहीं, चातुर्मास काल में मांगलिक व निर्माण-संबंधी शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, अतः इस अवधि में भूमि पूजन टालने की सलाह दी जाती है।

वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन
✍️ लेखक परिचय
वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन
संस्थापक, VASTU CLASS
आवासीय एवं औद्योगिक वास्तु विशेषज्ञ, प्रशिक्षक एवं वास्तु तकनीक शोधकर्ता
लेखक का परिचय

वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन

संस्थापक — VASTU CLASS एवं श्री नवग्रह वाटिका, पानीपत। आवासीय एवं औद्योगिक वास्तु विशेषज्ञ, प्रशिक्षक एवं वास्तु तकनीक शोधकर्ता।

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