ऊर्जा के प्रवाह को रोशनी, हवा और पानी के बहाव से देखें , ऊर्जा का प्रवाह पूर्व से दक्षिण पश्चिम को होता हुआ उत्तर व उत्तर ईशान में आता है !
वास्तु में भी ग्रहों को वही स्थान दिए गए हैं जैसी उनकी ऊर्जा है। वास्तु में भी पूर्व सूर्य के पास है। यह तेजोमय है। उत्तर पूर्व पर गुरु का अधिकार है। यह सकारात्मक और तेज है। उत्तर पर बुध का अधिकार है। यह रचनात्मक और सक्रिय है। उत्तर पश्चिम पर चंद्रमा का अधिकार है। यह रचनात्मक लेकिन अधिक विचार करने वाला है। पश्चिम पर शनि का अधिकार है। यह नकारात्मक और धीमा है। दक्षिण पश्चिम पर राहू का अधिकार है। यह नकारात्मक और रहस्य समेटे हुए है। दक्षिण पर मंगल का राज है। यह उग्र और दाह शक्ति देने वाला है। दक्षिण पूर्व पर शुक्र का राज है। यह उष्ण और तेजयुक्त है। ऊर्जा के हिसाब से ही हम उसे काम में लें तो अधिकतम परिणाम हासिल होंगे
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संतान, धन, स्वास्थ्य या पारिवारिक अशांति — इनका एक कारण घर का वास्तु दोष भी होता है
उपाय अपनी जगह हैं, पर यदि भवन की ऊर्जा ही असंतुलित हो तो परिणाम टिकते नहीं। वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन 2004 से पानीपत एवं आसपास के क्षेत्र में घर, दुकान और फैक्ट्री का वास्तु परीक्षण कर रहे हैं — बिना तोड़फोड़ के व्यावहारिक समाधान।
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