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इंडस्ट्रियल वास्तु गाइड 2026: फैक्ट्री में उत्पादन, लेबर, मशीनरी और कैश-फ्लो संतुलन का व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक विश्लेषण

इंडस्ट्रियल वास्तु केवल यह बताने तक सीमित नहीं है कि कौन-सी मशीन किस दिशा में रखी जाए। यह प्लॉट, मुख्य प्रवेश, मशीनरी भार, उत्पादन प्रवाह, अग्नि एवं विद्युत व्यवस्था, कच्चे माल, तैयार माल, प्रशासन, श्रमिक सुविधाओं, वेंटिलेशन, सुरक्षा और प्रबंधन के परस्पर संबंधों का समग्र अध्ययन है।

पारंपरिक वास्तु दिशा, पंचमहाभूत, वास्तु पुरुष मंडल और देवता-पदों के आधार पर स्थान की प्रकृति समझाता है। आधुनिक औद्योगिक विश्लेषण में इसके साथ मशीन फाउंडेशन, वाइब्रेशन, सामग्री की आवाजाही, कार्य-सुरक्षा, प्राकृतिक प्रकाश, वायु प्रवाह, तापमान, मानव व्यवहार और उत्पादन प्रक्रिया को भी देखना आवश्यक है।

इंडस्ट्रियल वास्तु गाइड 2026 - फैक्ट्री उत्पादन लेबर मशीनरी कैश-फ्लो वास्तु समाधान

VASTU CLASS का सिद्धांत: पहले वास्तविक समस्या को पहचानें, फिर नक्शा, दिशा, उपयोग और कार्यप्रवाह का परीक्षण करें; उसके बाद ही उपाय निर्धारित करें।

1. इंडस्ट्रियल वास्तु और आवासीय वास्तु में मूल अंतर

आवासीय और औद्योगिक वास्तु का आधार एक ही वास्तु दर्शन है, लेकिन दोनों के उद्देश्य, उपयोग और परिणाम अलग होते हैं।

आवासीय वास्तुइंडस्ट्रियल वास्तु
परिवार की दिनचर्याउत्पादन प्रक्रिया
शयनकक्ष, रसोई, पूजामशीनरी, बॉयलर, स्टोरेज
स्वास्थ्य एवं संबंधउत्पादकता एवं सुरक्षा
व्यक्तिगत आरामसैकड़ों लोगों की कार्यक्षमता
घरेलू ऊर्जा प्रवाहMaterial और Process Flow
सीमित विद्युत भारभारी विद्युत एवं तापीय भार
व्यक्तिगत निर्णयप्रबंधन, लेबर और बाजार समन्वय
घरेलू भंडारणRaw Material और Finished Goods

फैक्ट्री में केवल दिशा नहीं देखी जा सकती। इसलिए इंडस्ट्रियल वास्तु का सही दृष्टिकोण है: वास्तु सिद्धांत + इंजीनियरिंग व्यवहार्यता + सुरक्षा + उत्पादन प्रवाह

2. ग्रंथ-आधारित वास्तु और आधुनिक औद्योगिक व्याख्या

प्राचीन वास्तु ग्रंथों में आधुनिक CNC मशीन, बॉयलर, ऑटोमेशन लाइन, ट्रांसफॉर्मर या वेयरहाउस मैनेजमेंट का प्रत्यक्ष वर्णन नहीं मिलता, लेकिन उनमें भूमि, दिशा, मंडल, भार, प्रवेश, जल, अग्नि, खुलापन, निर्माण अनुपात और कार्य-विभाजन के सिद्धांत मिलते हैं। विश्वकर्मा परंपरा, मयमतम्, मानसार, समराङ्गण सूत्रधार और बृहत्संहिता जैसे ग्रंथों में भवन नियोजन की व्यापक दृष्टि दिखाई देती है। आधुनिक इंडस्ट्रियल वास्तु में इन सिद्धांतों को आज की फैक्ट्री की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार समझना पड़ता है — अग्नि क्षेत्र को बॉयलर/ट्रांसफॉर्मर से, पृथ्वी क्षेत्र को भारी मशीनरी से, वायु क्षेत्र को डिस्पैच/सेल्स से, और जल क्षेत्र को प्रवेश/प्रकाश से जोड़ा जा सकता है। यह आधुनिक व्याख्या है, शाब्दिक ग्रंथ-उद्धरण नहीं।

3. फैक्ट्री वास्तु निरीक्षण की सही प्रक्रिया

चरण 1 — वास्तविक उत्तर दिशा: मोबाइल कंपास की एक रीडिंग पर निर्भर न रहें, भवन की दिशा को विश्वसनीय उपकरण और साइट सत्यापन से मिलाएं। चरण 2 — प्लॉट और निर्मित क्षेत्र का केंद्र: अनियमित आकार, कटाव और कई शेड होने पर यह विशेष महत्वपूर्ण है। चरण 3 — मुख्य प्रवेश और वाहन प्रवेश: मालिक/स्टाफ प्रवेश, ट्रक प्रवेश, रॉ मटेरियल प्रवेश, तैयार माल डिस्पैच, आपातकालीन निकास — हर गेट का कार्य अलग है। चरण 4 — 32 द्वार पद विश्लेषण: पूर्व या उत्तर दिशा में गेट होने मात्र से वह स्वतः शुभ नहीं हो जाता, वास्तविक पद और अंदर का प्रवाह देखना आवश्यक है। चरण 5 — 45 देवता क्षेत्र: नेतृत्व, गति, सत्यता, नए अवसर, स्थिरता, सुरक्षा, सहयोग और आर्थिक फल जैसे विषय अलग-अलग पदों से जोड़े जा सकते हैं। चरण 6 — पंचतत्त्व और फंक्शनल उपयोग: जल, अग्नि, भारी भार, खुलापन किस क्षेत्र में हैं। चरण 7 — उत्पादन एवं सामग्री प्रवाह: रॉ मटेरियल से तैयार माल तक पूरा चक्र मैप करें। चरण 8 — समस्या का वास्तविक डेटा: मशीन ब्रेकडाउन रिकॉर्ड, रीजेक्शन प्रतिशत, लेबर टर्नओवर, भुगतान चक्र, स्टॉक एजिंग — वास्तु निष्कर्ष इन संकेतकों से मिलना चाहिए।

फैक्ट्री वास्तु जोन चार्ट - दिशा और तत्व गाइड

4. प्लॉट, सड़क, ढलान और भार संतुलन

वर्गाकार या संतुलित आयताकार प्लॉट कार्य-योजना के लिए सरल माना जाता है, लेकिन सड़क, प्रवेश, जल निकास, लेवल, अग्नि सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। अत्यधिक तिरछे प्लॉट में उपयोग क्षेत्रों का संतुलन कठिन हो सकता है। पारंपरिक वास्तु में उत्तर एवं पूर्व को हल्का तथा दक्षिण एवं पश्चिम को स्थिर और भारी रखने की अनुशंसा मिलती है — आधुनिक फैक्ट्री में इसका अर्थ है जल निकासी का सही ढलान, भारी स्टोरेज का स्थिर क्षेत्र, और उत्तर-पूर्व में प्राकृतिक प्रकाश व खुलापन। किसी भी स्लोप को तय करते समय सिविल इंजीनियरिंग और स्थानीय स्थलाकृति सर्वोपरि होगी।

5. मुख्य द्वार और 32 द्वार पदों का महत्व

इंडस्ट्रियल यूनिट में मुख्य प्रवेश अवसर, नियंत्रण और गतिविधि का प्रतीक माना जाता है, लेकिन हर उत्तरमुखी या पूर्वमुखी गेट समान प्रभाव नहीं देता। 32 द्वार पद विश्लेषण में देखा जाता है कि गेट किस सटीक पद पर है, किस उपयोग के लिए है, सामने कोई अवरोध तो नहीं, और प्रवेश प्रवाह उत्पादन/प्रशासन/स्टोरेज में कहाँ पहुँचता है। उदाहरण: उत्तर दिशा में बड़ा गेट हो पर सामने स्क्रैप और अव्यवस्थित सुरक्षा कक्ष हो, तो केवल दिशा सही होने से लाभ नहीं मिलेगा — प्रवेश प्रवाह भौतिक रूप से बाधित है। व्यवस्थित, प्रकाशित, नियंत्रित गेट अपेक्षाकृत साधारण दिशा में भी बेहतर परिणाम दे सकता है।

6. 45 देवता और औद्योगिक कार्यों की मैपिंग

VASTU CLASS की विशिष्टता 45 देवता क्षेत्रों को गुण, व्यवहार और कार्य-परिणाम के संकेतों के रूप में समझना है। पूषा: नए ग्राहक, नए प्रोजेक्ट और बाजार तक पहुँच — नई पूछताछ न आना इस क्षेत्र से जुड़ा हो सकता है। वितथ: वचन-क्रिया का अंतर, समयसीमा टूटना, डिलीवरी में देरी। मुख्य: नेतृत्व और संचालन — निर्णय लागू न हो पाना, विभागीय समन्वय की कमी। भल्लाट: परिश्रम का आर्थिक परिणाम — उत्पादन अच्छा पर लाभ न बनना। मित्र: सप्लायर, डीलर, पार्टनर संबंध — भुगतान विवाद, भरोसे की कमी। इन्द्र, जयन्त, सूर्य: अधिकार, प्रतिष्ठा, ब्रांड दृश्यता और नेतृत्व प्रभाव। यह मैपिंग प्रारंभिक संकेत देती है — अंतिम निर्णय भवन की वास्तविक स्थिति और व्यवसाय के डेटा से मिलाकर ही होना चाहिए।

7. मशीनरी, उत्पादन लाइन और वाइब्रेशन

भारी मशीनरी के लिए दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र पारंपरिक रूप से स्थिरता वाले माने जाते हैं, परंतु वैज्ञानिक रूप से मशीन का कंपन मशीन फाउंडेशन, एंकरिंग, भूमि की वहन क्षमता, RPM, रखरखाव और तापमान पर निर्भर करता है।

इंडस्ट्रियल वास्तु समाधान - मशीनरी ऊर्जा उत्पादन हिंदी

वास्तु सिद्धांतों में स्थिर क्षेत्रों में भारी मशीनरी रखने की अनुशंसा की जाती है, जबकि वास्तविक कंपन नियंत्रण के लिए मशीन फाउंडेशन और इंजीनियरिंग परीक्षण आवश्यक हैं।

मशीन लेआउट के नियम: रखरखाव के लिए पर्याप्त खुला स्थान, सुरक्षित ऑपरेटर आवाजाही, रॉ मटेरियल की आवाजाही उत्पादन लाइन को पार न करे, हॉट-कोल्ड प्रोसेस अलग हों, आपातकालीन निकास बाधित न हो, मशीनों के बीच दूरी सुरक्षा कोड से तय हो।

भारी मशीनरी लोड वितरण वास्तु लेआउट फैक्ट्री

उत्पादन प्रवाह: टेक्सटाइल, फूड, स्टील, केमिकल और पैकेजिंग उद्योगों का प्रोसेस अलग होता है। सही उत्पादन प्रवाह वह है जिसमें backtracking कम हो, cross-movement कम हो, सुरक्षा बढ़े और डिस्पैच तक सीधा संबंध बने।

8. अग्नि, विद्युत, बॉयलर और ट्रांसफॉर्मर

दक्षिण-पूर्व अग्नि तत्व का पारंपरिक क्षेत्र माना जाता है, इसलिए बॉयलर, फर्नेस, हीटर और इलेक्ट्रिकल पैनल के लिए इस क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाती है — साथ ही विद्युत सुरक्षा मानक, पर्याप्त क्लियरेंस, अग्निशमन पहुँच और वेंटिलेशन भी अनिवार्य हैं। क्या गलत दिशा का ट्रांसफॉर्मर निश्चित रूप से दुर्घटना कराएगा? नहीं — वास्तु अनुपयुक्त क्षेत्र असंतुलन का संकेत हो सकता है, पर वास्तविक कारण वायरिंग, ओवरलोडिंग या मानवीय त्रुटि भी हो सकता है। वास्तु निरीक्षण कभी भी Electrical Safety Audit का विकल्प नहीं है।

9. रॉ मटेरियल, फिनिश्ड गुड्स और डिस्पैच

स्टोरेज का सीधा संबंध कैश-फ्लो से है — जितना अधिक पैसा धीमी गति वाले स्टॉक में फँसा रहेगा, उतना अधिक कार्यशील पूंजी पर दबाव बनेगा। भारी रॉ मटेरियल दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम जैसे स्थिर क्षेत्रों में रखा जा सकता है, बशर्ते फ्लोर लोड क्षमता पर्याप्त हो, फायर सेपरेशन हो और FIFO प्रणाली लागू हो। उत्तर-पश्चिम को गति और आवागमन से जोड़कर तैयार माल और डिस्पैच के लिए उपयोगी माना जाता है — परंतु वास्तविक बिक्री केवल दिशा से नहीं बढ़ेगी; मांग, गुणवत्ता, मूल्य, वितरण और क्रेडिट नीति भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। वास्तु इस व्यवस्था को सहयोग दे सकता है, वह बाजार रणनीति का स्थान नहीं लेता।

इंडस्ट्रियल वास्तु गाइड 2026 - उत्पादन लेबर कैश-फ्लो ओवरव्यू हिंदी

10. मालिक, प्रशासन, अकाउंट्स और बिक्री विभाग

निदेशक/मालिक का केबिन दक्षिण-पश्चिम में स्थिरता और अधिकार से जोड़ा जाता है — बैठते समय पीछे ठोस समर्थन, सामने खुला दृश्य, प्रवेश दिखाई देना, सीधे दरवाजे की धारा में न बैठना ध्यान रखें। उत्तर दिशा को आय और अवसर से जोड़ा जाता है, इसलिए अकाउंट्स के लिए उपयोगी मानी जाती है — पर वित्तीय अनुशासन का वास्तविक आधार समय पर बिलिंग, देनदारों का फॉलो-अप और स्पष्ट क्रेडिट पॉलिसी है। सेल्स-मार्केटिंग के लिए पूर्व या उत्तर-पश्चिम जैसे गतिशील क्षेत्र उपयुक्त हैं, साथ में टीम को CRM और स्पष्ट लक्ष्य चाहिए।

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11. लेबर, सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल वातावरण

हर लेबर समस्या को वास्तु दोष कहना गलत है — वेतन में देरी, अनुचित व्यवहार, खराब पर्यवेक्षण, गर्मी-शोर, असुरक्षित मशीनें, खराब कैंटीन जैसे वास्तविक कारण भी होते हैं। वास्तु निरीक्षण में कार्यस्थल के हवा प्रवाह, तापमान, रोशनी, शोर, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित पैदल मार्ग और आपातकालीन निकास अवश्य देखने चाहिए। उत्तर और पूर्व से प्राकृतिक प्रकाश उपयोगी हो सकता है, पर तेज धूप और ग्लेयर को वैज्ञानिक शेडिंग से नियंत्रित करना होगा।

12. बिना तोड़-फोड़ औद्योगिक वास्तु सुधार

चलती फैक्ट्री में हर चीज शिफ्ट करना संभव नहीं, इसलिए Non-Demolition Vastu का उद्देश्य उपलब्ध संरचना के भीतर प्राथमिकता आधारित सुधार करना है। प्राथमिक स्तर (शून्य/कम लागत): कबाड़ हटाना, बाधित रास्ते खोलना, रोशनी बढ़ाना, कार्य टेबल व्यवस्थित करना, सुरक्षा संकेत लगाना। द्वितीय स्तर (उपयोग परिवर्तन): विभागों की अदला-बदली, Finished Goods को डिस्पैच के पास लाना, मालिक की बैठने की स्थिति सुधारना। तृतीय स्तर (सीमित तकनीकी परिवर्तन): हल्की पार्टिशन, रंगों का नियंत्रित उपयोग, Lighting redesign, Ventilation improvement। धातु, रंग, क्रिस्टल या पिरामिड का उपयोग तभी करें जब उद्देश्य और सीमा स्पष्ट हो — इन्हें इंजीनियरिंग, सुरक्षा या वित्तीय सुधार का विकल्प न मानें।

बिना तोड़फोड़ इंडस्ट्रियल वास्तु दोष निवारण हिंदी

13. वास्तविक केस का विश्लेषण कैसे प्रस्तुत करें?

एक टेक्सटाइल यूनिट में तैयार माल लंबे समय तक रुका था। निरीक्षण में पाया गया कि Finished Goods उत्पादन लाइन से बहुत दूर, संकरे मार्ग और धीमे लोडिंग क्षेत्र में रखा था, और उत्तर-पश्चिम क्षेत्र भी कबाड़ से भरा था। सुधार में कबाड़ हटाया गया, तैयार माल डिस्पैच के पास व्यवस्थित किया गया, FIFO प्रणाली लागू हुई और लोडिंग मार्ग स्पष्ट किया गया। इसके बाद डिस्पैच समय में कमी आई — यहां परिणाम केवल “दिशा बदलने” से नहीं, बल्कि वास्तु और ऑपरेशनल सुधार के संयुक्त प्रभाव से आया। यही ईमानदार दृष्टिकोण भरोसेमंद विश्लेषण की पहचान है।

14. इंडस्ट्रियल वास्तु में होने वाली सामान्य गलतियाँ

बिना नक्शे के फोन पर उपाय बता देना; हर उद्योग के लिए एक ही दिशा नियम लागू करना; सुरक्षा मानकों को वास्तु से कम महत्व देना; ट्रांसफॉर्मर या टैंक को केवल रंग से ठीक मान लेना; मार्केटिंग-वित्तीय समस्या को वास्तु दोष कहना; 100% परिणाम या निश्चित लाभ का दावा करना; मशीनरी शिफ्ट कराना पर Material Flow न देखना; गेट की दिशा देखना पर 32 द्वार पद न देखना; गलत केंद्र लेकर पूरा मंडल लगाना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इंडस्ट्रियल वास्तु आवासीय वास्तु से अलग है?
हाँ। मूल दिशा और पंचतत्त्व सिद्धांत समान हो सकते हैं, लेकिन उद्योग में मशीनरी, विद्युत भार, उत्पादन, श्रमिक, स्टोरेज, सुरक्षा और कैश-फ्लो का विश्लेषण अतिरिक्त रूप से करना पड़ता है।
भारी मशीनरी किस दिशा में रखनी चाहिए?
परंपरागत वास्तु में दक्षिण, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम को भारी भार के लिए उपयुक्त माना जाता है। अंतिम स्थान मशीन फाउंडेशन, सुरक्षा, रखरखाव और उत्पादन प्रवाह देखकर तय करें।
क्या मशीन गलत दिशा में होने से ही ब्रेकडाउन होता है?
नहीं। ब्रेकडाउन के तकनीकी कारणों की जांच अनिवार्य है। दिशा को सहायक वास्तु कारक के रूप में देखा जा सकता है।
फैक्ट्री का मुख्य गेट किस दिशा में अच्छा है?
उत्तर, पूर्व या कुछ परिस्थितियों में उत्तर-पश्चिम उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन सटीक 32 द्वार पद, सड़क, प्रवेश प्रवाह और गेट के वास्तविक उपयोग का परीक्षण आवश्यक है।
तैयार माल कहाँ रखा जाए?
उत्तर-पश्चिम को गतिशीलता से जोड़कर Finished Goods और डिस्पैच के लिए उपयोग किया जा सकता है, साथ में लॉजिस्टिक्स और स्टॉक मैनेजमेंट भी सुधारें।
क्या ट्रांसफॉर्मर केवल दक्षिण-पूर्व में ही होना चाहिए?
दक्षिण-पूर्व को अग्नि गतिविधि के लिए प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन विद्युत नियम, सुरक्षा दूरी और साइट की व्यवहार्यता सर्वोपरि हैं।
लेबर विवाद वास्तु से कैसे जुड़े हो सकते हैं?
असुविधाजनक वातावरण, गर्मी, वेंटिलेशन, अव्यवस्था और गलत विभागीय प्रवाह तनाव बढ़ा सकते हैं, लेकिन वेतन, नेतृत्व और HR नीतियों की जांच भी उतनी ही आवश्यक है।
क्या बिना तोड़-फोड़ फैक्ट्री वास्तु सुधारा जा सकता है?
कई मामलों में उपयोग परिवर्तन, स्टोरेज, प्रकाश, रास्ते, विभागीय स्थान और बैठने की व्यवस्था से सुधार संभव है। गंभीर संरचनात्मक समस्या में तकनीकी परिवर्तन आवश्यक हो सकता है।
क्या केवल रंग और धातु पट्टियाँ पर्याप्त हैं?
नहीं। ये सहायक उपाय हो सकते हैं। मुख्य सुधार वास्तविक समस्या, उपयोग, सुरक्षा और कार्यप्रवाह पर आधारित होना चाहिए।
45 देवता औद्योगिक वास्तु में कैसे उपयोगी हैं?
वे नेतृत्व, अवसर, वचन, सहयोग, गति, आर्थिक फल और व्यवहार जैसे गुणों का सूक्ष्म विश्लेषण करने में सहायता करते हैं।
क्या VASTU CLASS ऑनलाइन फैक्ट्री नक्शा देखता है?
नक्शा, वास्तविक उत्तर, प्लॉट माप, मशीन लेआउट, फोटो, वीडियो और समस्या डेटा उपलब्ध होने पर प्रारंभिक ऑनलाइन विश्लेषण किया जा सकता है। जटिल प्लांट के लिए ऑन-साइट निरीक्षण अधिक उपयुक्त होता है।
पानीपत और दिल्ली NCR में इंडस्ट्रियल वास्तु परामर्श कैसे लें?
VASTU CLASS से फैक्ट्री नक्शा विश्लेषण, ऑन-साइट निरीक्षण, मशीन लेआउट समीक्षा और बिना तोड़-फोड़ सुधार योजना के लिए +91 90500 90511 पर संपर्क किया जा सकता है।

निष्कर्ष: सही इंडस्ट्रियल वास्तु का वास्तविक अर्थ

इंडस्ट्रियल वास्तु का उद्देश्य किसी उद्योगपति को डराना या हर समस्या को दिशा दोष बताना नहीं है। इसका उद्देश्य भवन, मशीन, मनुष्य, सामग्री और प्रबंधन के बीच ऐसा संतुलन स्थापित करना है जिससे परिसर अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और कार्यक्षम बन सके। एक जिम्मेदार औद्योगिक वास्तु विश्लेषण में प्राचीन वास्तु सिद्धांतों का सम्मान, आधुनिक इंजीनियरिंग की समझ, सुरक्षा मानकों का पालन, मानव व्यवहार का अध्ययन और उत्पादन डेटा का परीक्षण — इन सबका समन्वय होना चाहिए। सही दिशा तभी उपयोगी है जब उसके साथ सही कार्य, सही व्यवस्था और सही निर्णय भी जुड़ा हो।

औद्योगिक वास्तु परामर्श के लिए संपर्क करें

यदि आपकी फैक्ट्री में उत्पादन क्षमता कम उपयोग हो रही है, मशीनें बार-बार बंद होती हैं, तैयार माल रुकता है, भुगतान अटकते हैं, लेबर टिकती नहीं, दुर्घटनाएँ बढ़ रही हैं, या नया प्लांट डिजाइन करना है — तो नक्शे, वास्तविक समस्याओं और साइट उपयोग का समग्र विश्लेषण कराएँ।

वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन
औद्योगिक एवं आवासीय वास्तु सलाहकार | 20+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव
VASTU CLASS – Shri Shri Navagrah Vatika
Panipat, Haryana, India
+91 90500 90511 | www.vastuclass.in


वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन
✍️ लेखक परिचय
वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन
संस्थापक, VASTU CLASS
आवासीय एवं औद्योगिक वास्तु विशेषज्ञ, प्रशिक्षक एवं वास्तु तकनीक शोधकर्ता
लेखक का परिचय

वास्तुविद् सुनील कुमार आर्यन

संस्थापक — VASTU CLASS एवं श्री नवग्रह वाटिका, पानीपत। आवासीय एवं औद्योगिक वास्तु विशेषज्ञ, प्रशिक्षक एवं वास्तु तकनीक शोधकर्ता।

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